शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाते हैं ?
शनिदेव को तेल उनकी पीड़ा दूर करने के लिए चढ़ाते है। जिससे शनिदेव प्रसन्न हो कर भक्तो की पीड़ा दूर करते है.
एक पौराणिक कथा के अनुसार लंका पर चढ़ाई के लिए समुद्र पर बांधे गए पुल की सुरक्षा का भार हनुमानजी को सौंपा गया था। हनुमानजी रात में भगवान राम का ध्यान करते हुए पुल की रक्षा कर रहे थे कि वहां शनिदेव आ पहुंचे और उन्हें व्यंग्यबाणों से परेशान करने लगे। इसी बीच शनिदेव ने हनुमानजी को युद्ध के लिए ललकारा। इस पर हनुमान जी नेविनम्रतापूर्वक मना कर दिया। उन्होंने कहा कि कृपया वह उन्हें पुल की रक्षा करने दें, मेरी अराधना में विघ्न ना डालें।
शनिदेव ने हनुमान जी को फिर ललकरते हुए कहा कि मैंने सुनाहै कि तुम बहुत बलवान हो, लेकिन मुझे देखते ही तुम्हारी ताकतकहां चली गई। या तो मुझसे युद्ध करो अन्यथा मेरे दास बनजाओ। इस पर हनुमानजी ने शनिदेव को अपनी पूंछ में फंसा लियाऔर घूमा-घूमा कर एक पर्वत से दूसरे पर्वत पर दे मारा। इससेशनिदेव का सारा शरीर छलनी हो गया। शरीर पर रगड़ के घावों सेत्रस्त शनिदेव ने हुनमान जी से उन्हें मुक्त करने की प्रार्थना की औरकहा कि आज से मैं आपकी हर बात मानूंगा।

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