महामृत्युंजय मंत्र” भगवान शिव द्वारा दिया सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है। महामृत्युंजय मंत्र (mahamrityunjay mantra) एक प्रभावशाली मंत्र है.इसे संजीवनी मंत्र भी कहते है.,ये नव जीवन देने वाला मंत्र है. इस मंत्र से मृत्यु तुल्य भी कष्ट भी कम होता है.
महामृत्युंजय मंत्र का जप आवश्यकता के अनुरूप होते हैं। अलग-अलग उद्देश्य के लिये अलग-अलग मंत्रों का प्रयोग होता है। मंत्र में दिए अक्षरों एवं उसकी संख्या के अनुरुप से उसके प्रभाग मे बदलाव आते है। यह मंत्र निम्न प्रकार से है-
एकाक्षरी मंत्र- हौं । (एक अक्षर का मंत्र)
त्र्यक्षरी मंत्र- ॐ जूं सः । (तीन अक्षर का मंत्र)
चतुरक्षरी मंत्र- ॐ वं जूं सः। (चार अक्षर का मंत्र)
नवाक्षरी मंत्र- ॐ जूं सः पालय पालय। (नव अक्षर का मंत्र)
दशाक्षरी मंत्र- ॐ जूं सः मां पालय पालय। (दश अक्षर का मंत्र)
(स्वयं के लिए इस मंत्र का जप इसी तरह होगा। यदि किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह जप किया जा रहा हो तो 'मां' के स्थान पर उस व्यक्ति का नाम लेना होगा)
महामृत्युंजय मंत्र
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
इस मंत्र में द्वात्रिंशाक्षरी (32 अक्षर का मंत्र) का प्रयोग हुआ है और इसी मंत्र में ॐ' लगा देने से 33 शब्द हो जाते हैं। इसे 'त्र्यत्रिंशाक्षरी या तैंतीस अक्षरी मंत्र कहते हैं। श्री वशिष्ठजी ने इन 33 शब्दों के 33 देवता समाहित है अर्थात् शक्तियाँ निश्चित की हैं जो कि निम्नलिखित हैं।
इस मंत्र में
8 वसु,
11 रुद्र,
12 आदित्य
1 प्रजापति तथा
1 वषट को माना है।
महामृत्युंजय मंत्र (Mahamirtunjay mantra in hindi)
महामृत्युंजय मंत्र का जप आवश्यकता के अनुरूप होते हैं। अलग-अलग उद्देश्य के लिये अलग-अलग मंत्रों का प्रयोग होता है। मंत्र में दिए अक्षरों एवं उसकी संख्या के अनुरुप से उसके प्रभाग मे बदलाव आते है। यह मंत्र निम्न प्रकार से है-
एकाक्षरी मंत्र- हौं । (एक अक्षर का मंत्र)
त्र्यक्षरी मंत्र- ॐ जूं सः । (तीन अक्षर का मंत्र)
चतुरक्षरी मंत्र- ॐ वं जूं सः। (चार अक्षर का मंत्र)
नवाक्षरी मंत्र- ॐ जूं सः पालय पालय। (नव अक्षर का मंत्र)
दशाक्षरी मंत्र- ॐ जूं सः मां पालय पालय। (दश अक्षर का मंत्र)
(स्वयं के लिए इस मंत्र का जप इसी तरह होगा। यदि किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह जप किया जा रहा हो तो 'मां' के स्थान पर उस व्यक्ति का नाम लेना होगा)
महामृत्युंजय मंत्र
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
इस मंत्र में द्वात्रिंशाक्षरी (32 अक्षर का मंत्र) का प्रयोग हुआ है और इसी मंत्र में ॐ' लगा देने से 33 शब्द हो जाते हैं। इसे 'त्र्यत्रिंशाक्षरी या तैंतीस अक्षरी मंत्र कहते हैं। श्री वशिष्ठजी ने इन 33 शब्दों के 33 देवता समाहित है अर्थात् शक्तियाँ निश्चित की हैं जो कि निम्नलिखित हैं।
इस मंत्र में
8 वसु,
11 रुद्र,
12 आदित्य
1 प्रजापति तथा
1 वषट को माना है।

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